Showing posts with label yaado poem. Show all posts
Showing posts with label yaado poem. Show all posts

Thursday, June 23, 2011

मै सोता रहा तेरी यादों के चराग जला कर

मै सोता रहा तेरी यादों के चराग जला कर,

लगा गयी आग एक हलकी सी हवा आ कर,

इसे मेरी बदनसीबी नहीं तो और क्या कहोगे,

प्यासा रहा मै दरि या के इतने पास जा कर,

आज जब तेरी पुरानी तस्वीरों को पलटा मैंने,

हंसती है कैसे देखो ये भी मुझे रुला कर,

किस्मत ने दिया धोखा और खो दिया तुझे,

क्या करूँगा मै अब सारा जहाँ पा कर,

दिल की गहराइयों मे कितने उतर गए हो तुम,

कोई देख भी नहीं सकता उतनी गहराइयों मे जा कर,

जब तुमने कहा मुझसे के मेरे नहीं हो तुम,

लगा जैसे मौत चली गयी हो मुझको गले लगा कर.....

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये है?

माँ मेरा मन बात ये समझ ना पाये है, ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है? पहले पापा मुन्ना मुन्ना कहते आते थे, टॉफियाँ खिलोने साथ मे...