Saturday, July 16, 2011

अंदाज़ तुम्हारे जैसा था

बारिश की तरह बूंदों ने जब

दस्तक दी दरवाजे पर

महसूस  हुआ तुम आये हो ..

अंदाज़ तुम्हारे जैसा था






हवा के हलके झोके ने जब

आहात की खिड़की पर

महसूस  हुआ  तुम  चलते हो ...

अंदाज़ तुम्हारे जैसा था






मैंने बूंदों को अपने हाथ पे टपकाया तो

एक सर्द सा क्यों एहसास हुआ....

की लफ्ज़ तुम्हारे जैसा था






मैं तनहा चला जब बारिश मई

एक झोके ने मेरा साथ दिया

मई समझा तुम हो साथ मेरे

एहसास तुम्हारे जैसा था






फिर रुक गई वो बारिश भी

और रही न बाकि आहात भी

मई समझा मुझे तुम छोड़ गई...

अंदाज़ तुम्हारे जैसा था.






बारिश की तरह बूंदों ने जब

दस्तक दी दरवाजे पर

महसूस हुआ तुम आये हो...

अंदाज़  तुम्हारे जैसा था.!!!!!

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