Monday, February 28, 2011

ऐ दोस्त अब तेरे बिना जीना गंवारा ना होगा


ऐ दोस्त अब तेरे बिना जीना गंवारा ना होगा,
भूल जाऊं जो नाम 1 पल के लिए तुम्हारा ना होगा,
तुम भी कंही अपनी दुनिया बसाओगे फिर से,
पर हमारे बिना तुम्हारा भी गुज़ारा ना होगा.


तेरी आँखों से भी फिर से बरसातें ही होंगी,
जो तेरी आँखों के आगे ये नज़ारा ना होगा,
तेरे कानो में गुन्जेंगे ये अल्फाज़ मेरे,
इतनी आवाज़ देंगे जितना किसी ने तुझे पुकारा ना होगा.

दिल के ज़ज्बातों को कागज़ पर उड़ेलोगे तुम भी,
कांपेगी उंगलियाँ और कोई सहारा ना होगा,
जब भी मिलेगा कोई ख़त तुझे गुमनामियों मे,
ख्याल आएगा मेरा पर वो ख़त हमारा ना होगा.

2 comments:

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये है?

माँ मेरा मन बात ये समझ ना पाये है, ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है? पहले पापा मुन्ना मुन्ना कहते आते थे, टॉफियाँ खिलोने साथ मे...