Monday, March 28, 2011

आइना भी तेरे दीदार से इतरा रहा है

आइना भी तेरे दीदार से इतरा रहा है,
वो खुद को इस ज़माने मे सबसे हसीं पा रहा है,
वो नादान तो इतना भी नहीं समझता ,
...तेरा रूप उसे इतना हसीं बना रहा है....
Hindi Poem

No comments:

Post a Comment

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये है?

माँ मेरा मन बात ये समझ ना पाये है, ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है? पहले पापा मुन्ना मुन्ना कहते आते थे, टॉफियाँ खिलोने साथ मे...